आओ बैठें, बातें करें

आओ बैठें , बातें करें भूल से गये हैं मीठे से तीखे से शब्दों का स्वाद आओ बैठें... बस दिन को रात, रात को दिन करें जा रहें हैं लम्हे फिसल रहें हैं, हम खर्च होते जा रहें हैं 'कैसे हो?' इसका जवाब हर बार 'बढ़िया' तो नही होता इस 'बढ़िया' के नीचे क्या छुपा… Continue reading आओ बैठें, बातें करें

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